Saturday, September 25, 2021
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बांदा-दूसरे दिन भी बैंकों में रही हड़ताल, निजीकरण बर्दाश्त नहीं

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दूसरे दिन भी बैंकों में रही हड़ताल, निजीकरण बर्दाश्त नहीं
– बैंक कर्मचारियों ने विभिन्न स्थानों पर किया प्रदर्शन, नारेबाजी
बांदा। मंगलवार को दूसरे दिन भी बैंकों में हड़ताल रही। बैंक कर्मचारियों ने दूसरे दिन भी प्रदर्शन किया। कहा कि निजीकरण किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दूसरे दिन 100 करोड़ का व्यवसाय प्रभावित हुआ। हड़ताल की वजह से खाताधारकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
गौरतलब है कि निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था। इसके तहत मंगलवार को दूसरे दिन स्टेट बैंक आॅफ इंडिया को छोड़कर बैंक आफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आर्यावर्त बैंक समेत 12 बैंकों की लगभग एक सैकड़ा शाखाओं के कर्मचारियों ने अलग-अलग स्थानों पर सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। पहले दिन सोमवार को 90 करोड़ का लेन-देन प्रभावित हुआ था जबकि मंगलवार को दूसरे दिन पूरे 100 करोड़ का व्यवसाय प्रभावित हुआ। कर्मचारियों ने डीएम कालोनी स्थित आर्यावर्त क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद जेएन कालेज के बाहर भी बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। बाद में क्षेत्रीय प्रबंधक को मांगों का ज्ञापन सौंपा। यूनियन के जिला मंत्री रावेंद्र शुक्ला ने कहा कि बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जहां कर्मचारियों की समस्याओं को दूर किया जाना चाहिए, वहा सरकार निजीकरण की ओर ध्यान दे रही है। बैंक कर्मचारी लंबे समय से विभिन्न प्रकार की मुसीबतों से जूझ रहा है, इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। निजीकरण का खुलकर विरोध करते हुए बैंक कर्मियों ने कहा कि इससे कर्मचारियों की नौकरी को खतरा उत्पन्न होगा बल्कि उत्पीड़न में भी इजाफा होगा। इसी तरह यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के बैनर तले बैंक कर्मियों ने जेएन कालेज के नजदीक विरोध-प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए कहा कि निजीकरण किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संयोजक टीडी सागर ने कहा कि किसी समस्या का समाधान निजीकरण नहीं बल्कि मूलभूत समस्या को जड़ से समाप्त करना चाहिए। आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों को लाभ दिलाने के लिए निजीकरण का कार्य कर रही है, यह सोंचनीय विषय है। इससे बैंक कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराता रहेगा और उत्पीड़न में भी इजाफा होगा। एक स्वर से बैंक कर्मचारियों ने कहा कि निजीकरण किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान टीडी सागर, पुलकित सचान, महेंद्र प्रताप सिंह, नितिन श्रीवास्तव के अलावा सैकड़ों बैंक कर्मचारी मौजूद रहे।
इनसेट
क्या हैं बैंक कर्मियों की मांगें
– ग्रामीण बैंकों की 11वें वेतन समझौते को पूर्ण लागू करें
– बैंकों के निजीकरण की नीति को वापस लिया जाए
– ग्रामीण बैंकों में भी प्रवर्तक बैंक के अनुरूप संशोधित पदोन्नति प्रक्रिया लागू की जाए
– एनपीएस व्यवस्था समाप्त कर पेंशन योजना 1993-95 लागू की जाए
– दैनिक वेतन भोगी को नियमित किया जाए

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