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कोषागार घोटाला

पेंशन घोटाले में बड़ा खुलासा: बिचौलियों संग मिलकर पेंशनरों ने बांटी अतिरिक्त रकम, एसआईटी जांच में सनसनीखेज तथ्य उजागर

चित्रकूट में कोषागार विभाग से जुड़ा करोड़ों रुपये का घोटाला अब गहराता जा रहा है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की पूछताछ में सामने आया है कि कई पेंशनरों को अपने खातों में आई अतिरिक्त रकम की जानकारी थी। उन्होंने यह पैसा बिचौलियों के साथ मिलकर आपस में बांटा। इस खुलासे से जांच एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।

पेंशनरों ने माना – “मिलता था 20% हिस्सा”

एसआईटी की पूछताछ में 12 पेंशनर और कुछ बिचौलिए पेश हुए। पूछताछ में कई पेंशनरों ने स्वीकार किया कि उन्हें अतिरिक्त धनराशि का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था। उनका कहना था कि यह सारा काम उनके आस-पड़ोस के विश्वसनीय लोग करते थे, जो उन्हें बैंक ले जाकर रुपये निकलवाते थे।

वहीं, कुछ पेंशनरों ने खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें केवल अपनी नियमित पेंशन की ही जानकारी थी और किसी अतिरिक्त रकम की भनक तक नहीं थी। कई पेंशनर जांच टीम के सामने हाथ जोड़कर खड़े हुए और बोले कि उन्हें नहीं पता कि उनके खाते में अतिरिक्त पैसे कैसे आए।

बैंक खातों और लेनदेन की बारीकी से जांच

एसआईटी ने सभी संबंधित पेंशनरों के बैंक खातों और लेनदेन का मिलान किया है। जांच के दौरान कुछ नाम कोषागार विभाग के कर्मचारियों से भी जुड़े पाए गए हैं। पेंशनरों ने बताया कि बिचौलियों का कहना था कि “विभाग के अफसरों की अनुमति है, इसलिए डरने की कोई बात नहीं।”

मंगलवार को सीओ सिटी अरविंद वर्मा और जांच अधिकारी अजीत पांडेय की टीम ने अदालत से जुड़े कागजात एकत्र किए। फिलहाल किसी आरोपी को जेल नहीं भेजा गया है, लेकिन जांच की दिशा तय करने के लिए सभी खातों की बारीकी से जांच जारी है।


93 पेंशनरों के खाते सीज, 5 हजार से अधिक पेंशनर परेशान

इस घोटाले में अब तक 93 पेंशनरों और उनके सहयोगियों के बैंक खाते सीज किए जा चुके हैं। जांच लंबी खिंचने के चलते कोषागार विभाग ने पेंशन जारी करने वाला डिजिटल सिस्टम अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। परिणामस्वरूप, जिले के करीब 5,000 से अधिक पेंशनरों की नवंबर माह की पेंशन समय पर नहीं पहुंच पाई है।

कोषागार दफ्तर में रोजाना बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशनर अपने परिजनों के साथ पहुंचकर यही सवाल पूछ रहे हैं – “हमारी पेंशन कब मिलेगी?”

दो दिनों में सामान्य होंगे भुगतान

वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि निदेशालय से कोषागार के डिजिटल पेमेंट एप का नियंत्रण अस्थायी रूप से रोका गया था, लेकिन अब इसे सामान्य कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिन पेंशनरों का सत्यापन पूरा हो चुका है, उनके खातों में दो दिनों के भीतर नवंबर माह की पेंशन भेजनी शुरू कर दी जाएगी।

विभाग के बाहर तीन सौ से अधिक पेंशनर अपने “जीवित प्रमाण पत्र” जमा कराने के लिए कतार में खड़े दिखाई दिए। अफसरों ने साफ किया कि जांच के दायरे में आए लोगों को छोड़कर अन्य सभी की पेंशन जल्द जारी कर दी जाएगी।


निष्कर्ष

चित्रकूट का यह कोषागार घोटाला अब सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि विश्वास और प्रणाली पर लगे सवाल का प्रतीक बन गया है। एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए चेहरे और विभागीय नाम सामने आ रहे हैं। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस पेंशन घोटाले में असली दोषी कौन निकलेगा और कब तक आम पेंशनरों को उनका हक मिल पाएगा।

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