📌 प्रीतम सिंह ‘किसान’ केस: हाईकोर्ट में पेश हुए, बोले– पुलिस की बदसलूकी से टूट गया, अब किसी केस में वांछित नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026
हमीरपुर | इलाहाबाद हाईकोर्ट | विशेष रिपोर्ट
हमीरपुर जिले से जुड़े बहुचर्चित प्रीतम सिंह ‘किसान’ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा घटनाक्रम सामने रखा है।
हाईकोर्ट में दाखिल हैबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 972/2025 की सुनवाई के दौरान प्रीतम सिंह ‘किसान’ को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्होंने पूरे घटनाक्रम का विस्तार से बयान दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रीतम सिंह पुलिस की हिरासत में नहीं हैं और वह अब किसी भी मामले में वांछित नहीं हैं।

🔴 क्या है पूरा मामला?
यह याचिका प्रीतम सिंह की कथित अवैध पुलिस हिरासत को लेकर दाखिल की गई थी।
परिवार और समर्थकों का आरोप था कि उन्हें पुलिस ने उठा लिया है, जबकि पुलिस का दावा रहा कि वे खुद छिपे हुए थे।
⚖️ हाईकोर्ट में पेशी
इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ—
- न्यायमूर्ति जे.जे. मुनिर
- न्यायमूर्ति संजीव कुमार
के समक्ष थाना राठ, जनपद हमीरपुर के थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने प्रीतम सिंह ‘किसान’ को पेश किया और उनकी पहचान कराई ।
🗣️ कोर्ट में प्रीतम सिंह ‘किसान’ का बयान
प्रीतम सिंह ने अदालत को बताया कि—
- वह एक बार राठ विधानसभा व तीन बार लोकसभा हमीरपुर से चुनाव लड़ चुके हैं
- एक बार पार्टी अध्यक्ष रह चुके हैं
- पेट्रोल पंप के मालिक हैं
उन्होंने बताया कि 18 अक्टूबर की रात उनके पेट्रोल पंप पर कुछ लोग शराब के नशे में पहुंचे और सेल्समैन के साथ मारपीट करने लगे।
स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने:
- अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से एक हवाई फायर किया
- किसी को कोई चोट नहीं लगी
- 112 और कोतवाली में फोन करने का प्रयास किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई
🚔 पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप
प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि:
- पुलिस मौके पर पहुंची
- उपद्रव करने वालों से पूछताछ के बजाय
- उन्हें ही आरोपी मान लिया गया
- 307 का मुल्जिम बताते हुए जबरन थाने ले जाया गया
थाने में:
- घंटों खड़ा रखा गया
- रात भर बैठाया गया
- फोन छीन लिया गया
- बेटे के सामने अपमानजनक व्यवहार किया गया
इस बयान के दौरान प्रीतम सिंह कई बार भावुक होकर रो पड़े ।
😔 छोड़े जाने के बाद की हालत
प्रीतम सिंह ने कोर्ट को बताया कि:
- सुपुर्दगीनामा लिखवाकर उन्हें छोड़ा गया
- रिवॉल्वर बेटे को दे दी गई
- DVR और राइफल मांगने पर उन्हें दोबारा रोका गया
- मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे
- कई दिन अकेले रहे और फिर इधर-उधर भटकते रहे
उन्होंने खुद को
👉 “जिंदा लाश की तरह”
बताया।
📍 लखनऊ से बरामदगी
प्रीतम सिंह के अनुसार:
- उनके पास मोबाइल नहीं था
- बाद में वे लखनऊ में अपने मित्र यशपाल सिंह के घर पहुंचे
- उसी नंबर से बेटे को सूचना दी
- उसी कॉल के आधार पर पुलिस वहां पहुंची
🏛️ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि:
- प्रीतम सिंह पुलिस हिरासत में नहीं थे
- वे पुलिस बदसलूकी के शिकार हो सकते हैं
- कोर्ट उनके बयान की सच्चाई या झूठ पर टिप्पणी नहीं कर रहा
- बयान को रिकॉर्ड का हिस्सा माना जाएगा
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि:
- प्रीतम सिंह किसी अन्य केस में वांछित नहीं हैं
- वह जहां चाहें, स्वतंत्र रूप से जा सकते हैं ।
📅 आगे क्या होगा?
- हैबियस कॉर्पस याचिका निस्तारित
- अन्य राहतें इस याचिका में संभव नहीं
- मामले को क्रिमिनल मिसलेनियस रिट में बदला जाएगा
- अगली सुनवाई की तारीख: 6 जनवरी 2026
हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति:
- एसपी हमीरपुर
- थाना प्रभारी राठ
को 48 घंटे में भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
🧾 निष्कर्ष
प्रीतम सिंह ‘किसान’ मामला अब कानूनी रूप से नए चरण में प्रवेश कर चुका है।
हाईकोर्ट ने व्यक्ति की स्वतंत्रता स्पष्ट की,
लेकिन पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों को
आगामी आपराधिक रिट याचिका के लिए खुला रखा है।
👉 अब सभी की निगाहें 6 जनवरी 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं।
